अपनी उम्र से 30 साल बड़े शख्स से शादी के लिए मु’स्लिम बन गई थीं ‘सरोज खान’, बच्चों के जन्म के बाद पति ने छोड़ दिया अकेला

अपनी उम्र से 30 साल बड़े शख्स से शादी के लिए मु’स्लिम बन गई थीं ‘सरोज खान’, बच्चों के जन्म के बाद पति ने छोड़ दिया अकेला

2000 से भी ज्यादा गानों को कोरियोग्राफर कर चुकीं सरोज खान का आज जन्मदिन है। हालांकि पिछले साल 3 जुलाई को सरोज का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। सरोज खान ने बॉलीवुड की हर बड़ी अभिनेत्री को अपने डांस मूव्स पर नचवाया है। माधुरी दीक्षित, श्रीदेवी, ऐश्वर्या जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों ने उन्हें अपना डांस गुरू माना। 40 साल के करियर में सरोज खान ने तीन बार नेशनल अवॉर्ड भी जीता। प्रोफेशनल लाइफ में सरोज भले ही कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ती गईं हों लेकिन उनकी निजी जिंदगी काफी तकलीफों से भरी हुई रही। महज 13 साल की उम्र में सरोज खान की शादी हो गई। चलिए आपको बताते हैं सरोज की जिंदगी की कुछ अनकही बातें…

सरोज खान नहीं था असली नाम:सरोज खान का असली नाम निर्मला नागपाल था। सरोज के पिता का नाम किशनचंद सद्धू सिंह और मां का नाम नोनी सद्धू सिंह था। विभाजन के बाद सरोज खान का परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया। सरोज ने महज 3 साल की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था।

सोहनलाल से शादी के लिए कबूल किया इस्लाम:स्कूल जाने की उम्र में सरोज ने सोहनलाल से शादी कर ली थी। उस वक्त वे नहीं जानती थीं कि सोहनलाल पहले से शादीशुदा और 4 बच्चों के पिता हैं। दोनों की उम्र में 30 साल का फासला था। शादी के वक्त सरोज की उम्र 13 साल थी। सरोज खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘मैं उन दिनों स्कूल में पढ़ती थी तभी एक दिन मेरे डांस मास्टर सोहनलाल ने गले में काला धागा बांध दिया था और मेरे शादी हो गई थी।’

फिल्मी करियर सुपरहिट रहा:1974 में आई ‘गीता मेरा नाम’ पहली फिल्म थी, जिसमें सरोज खान ने कोरियोग्राफ किया था। ‘मिस्टर इंडिया’ में हवा-हवाई (1987) और 1988 में आई ‘ते”जाब’ में एक दो तीन डांस नंबर ने सरोज खान की किसम्त बदल दी। इसके बाद सरोज खान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने फिल्मी करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक डांस नंबर दिए। उन्होंने बड़ी हीरोइनों को अपनी ऊंगलियों पर नचाया।

सरोज खान ने जब पहले बेटे को जन्म दिया तब उन्हें अपने पति की पहली शादी के बारे में पता चला। 1965 में उनकी दूसरे बच्चे का जन्म हुआ, जो 8 महीनों बाद ही गुजर गया। जब सोहनलाल ने सरोज के दोनों बच्चों को अपना नाम देने से इनकार किया तब दोनों की राहें अलग हो गईं। दोनों की शादी महज 4 साल ही चली। इ”स्लाम कबूलने को लेकर एक बार सरोज खान ने कहा था कि ‘मैंने अपनी मर्जी से इ”स्लाम अपनाया था। मुझे इ”स्लाम ध”र्म से प्रेरणा मिलती है। मुझपर कोई दवाब नहीं था।’

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